10 Short Hindi Moral Stories for Kids Part 1 (बच्चों के लिए लघु हिंदी नैतिक कहानियाँ )

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हेलो रीडर्स कैसे है आप लोग ? आशा करता हु की आप सभी लोग बिलकुल ही ठीक होंगे, और अपने सेहत का ध्यान जरूर रखे. इन दिनों बहार के हालत बिलकुल ही ठीक नहीं है तो आपको उचित लगे और काम हो तो ही घर से बहार निकले.

आज हम यहाँ पर बात करने वाले है कुछ Short Hindi Moral Stories for Kids के बारे में जिसको पढ़कर आपको बहोत ही मजा आने वाला है और आपको यह सभी हिंदी स्टोरीज बहोत ही पसंद आने वाली है. आप निचे कमेंट करके हमें बता सकते है आपको यह हिंदी कहानिया कैसी लगी और आपको और मजेदार शार्ट हिंदी स्टोरीस चाहिए या नहीं.

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10 Short Hindi Moral Stories for Kids

यह बहोत ही छोटी कहानिया है और इसमें आपको बहोत ही मजा आने वाला है. आप इसे अपने बच्चो को भी सुना सकते है. यह सामाजिक और जीवन में सूखने को प्रेरित करती है जिससे की बचो को बहोत ही मजा आता है और वह इन कहानियो से बहोत कुछ अच्छा सिख सकते है.

Short Hindi Moral Stories- 1 शेर और चूहा

Short Hindi Moral Stories 1
Short Hindi Moral Stories

एक बड़ासा जंगल था जिसमे एक शेर रहता था और वह उसका राजा था. एक बार दुपहर को वह सो रहा था. तब थोड़े चूहों का झुंड आया और उसके पास खेल कूद करने लगे. एक छुहा तो उसके शरीर पर चढ़ गया और ऊपर दौड़ने लगा. उससे शेर की नींद ख़राब हो गयी और वह तुरंत ही जाग गया. उसने देखा तो बहोत सारे छोटे छोटे चूहे उसके आसपास खेल रहे थे और एक तो उसके ऊपर खेल रहा था शेर को बहोत ही गुस्सा आया और उसके पास एक पंजा मारा, चूहे को कुछ हुआ नहीं पर वह बहोत ही डर गया.

शेर ने चूहे को पकड़ लिया पर नन्हे चूहे ने शेर सेअनुरोध किया, “वनराज आप तोजंगल के राजा है मुझे खाने से आपकी भूख कहा मिटने वाली है. जब समय आएगा तो में भी आपकी मदत करूँगा.

चूहे की बात सुनकर शेर हँस पड़ा, और कहा, छोटे चूहे तुम मुझे जानते हो अब तुम मेरी मदत करोगे, भगजो यहासे इस बार जाने दे रहा हु अगली बार नहीं जाने दूंगा। यह बात सुनकर चूहे ने शेर का धन्यवाद् माना और वहा से भाग गया.

कुछ दिनों बाद शिकारी जंगल में शिकार करने आये और सारे जंगल में कही जगह उसने जाल बिछाये, और कही पे छुप गए, शेर आराम से रस्ते से घर की तरफ आ रहा था और बदकिस्मती से उस जाल में फस गया. उसने बहोत कोशिश किए पर वह उसमे से बहार नहीं निकल पाया और नहीं जाल को तोड़ पाया क्यों की वह बहोत ही मजबूत थी. सेर जोर जोर से चिल्लाने लगा.

चूहे ने शेर की दहाड़ सुनी और वह भाग के शेर की और आया, शेर की यह हालत देख कर शेर मदद करने के लिए दौड़ा। चूहे के डट सबकुछ काट सकते है और उसने जल्दी ही पुरे जाल को काट दिया। शेर उसमे से बहार निकल गया और दोनों काफी खुश हुए. और शेर बड़ी कृतज्ञता के साथ बोला, मेरे छोटे दोस्त! आपका बहुत बहुत धन्यवाद, में गलत था की तुम मेरी मदत नहीं कर सकते.

सिख- कोई भी कितनाभी छोटा या बड़ा हो सबको एक दिन कोई न कोई काम में जरूर आता है तो कभी अपने बड़े होने का घमंड नहीं करना चाहिए. यह बहोत ही पॉपुलर Short Hindi Moral Stories है.

Short Hindi Moral Stories- 2 गणेश जी और कार्तिकेय

Short Hindi Moral Stories 2
Short Hindi Moral Stories

शंकर और उमिया के दो बेटे थे। एक का नाम कार्तिकेय और दूसरे का नाम गणेश है। दो भाइयों में गणेश दुंदला थे। छोटे छोटे पैर और बड़ा बड़ा सिर। कार्तिकेय एक हिरण की तरह भागता था और बहोत ही सुन्दर थे, लेकिन गणेश का पेट एक बड़े बक्से की तरह था, जब दौड़ने या कूदने की बात आती है, तो वे इसे पसंद नहीं करते हैं.

एक दिन गणेश और कार्तिकेय के बिच जगदा हो गया, एक कहता है, मैं सबसे तेज हूं. एक और कहता है, मैं तुमसे तेज और मजबूत हूं. दोनों को लड़ते देख, उमिया ने कहा: तुम दोनों एक साथ बाहर जाओ और पूरी दुनिया से 68 तीर्थ की यात्रा करके वापस आओ, देखते है दोनों में से पहला घर वापस कौन आता है. जो सबसे पहले वापस आया वह सबसे तेज होगा।

कार्तिकेय ने दुनिया की यात्रा करने के लिए मोर के ऊपर चढ़ गए जो उनका पसंदीदा वाहन है. जबकि गणेश बैठते हैं और सोचते हैं, इस कार्तिकेय तक कैसे पहुंचा जा सकता है? उससे पहले तो में कभी पूरी दुनिया की यात्रा नहीं कर सकता वह भी इस बड़े पेट और सर के साथ.

(यह पौराणिक कथा पे आधारित Short Hindi Moral Stories है.)

गणेश उलझन में थे, अचानक उसके दिमाग में एक आइडिया आया. उसने मा से कहा, “मा, तुम यहां इस सिंहासन पर बैठो।” फिर उसने जाकर अपने पिता को बुलाया और कहा, “पिताजी, आप भी माँ के साथ इस सिंहासन पर बैठें।” शंकर ने कहा, “यह सब आप तीनो ने क्या शुरू किया है, गणेश ? कार्तिकेय कहाँ है? ”

उमिया ने कहा, “यह बहुत दूर चला गया है, दो भाई इस शर्त पर उतरे हैं कि कोण सबसे तेजक है और ताकतवर भी. इसलिए दोनों को 68 तीर्थ की यात्रा करनी है. जो भी पहले ख़तम करके आएगा वह सबसे तेज और ताकतवर.

यह सुनकर शंकर ने गणेश से पूछा, “गणेश, आप कब जा रहे हैं?” गणेश ने सिर हिलाया और कहा में भी उसी की और बढ़ रह हु देखें. फिर उन्होंने सिंहासन पर बैठे माता-पिता की पूजा की और उनकी परिक्रमा शुरू करदी। वह घूमता है और कहता है, माँ भगवान है, पिता भगवान है. एक बार, दो बार, तीन बार – अड़सठ बार गणेशजी ने अपने माता-पिता की तृत यात्रा कियी, फिर उनके चरणों में गिर गए और कहा:

“दुनिया में सबसे बड़ा तीर्थ माता-पिता हैं। मैं एक तीर्थयात्री हूं
अड़सठ बार तीर्थ यात्रा करके। मेरा अड़सठ तीर्थ की यात्रा समाप्त हो गयी है। ”

यह सुनकर शंकर कहते हैं, “गणेश, आप छोटे लेकिन बहुत चतुर हैं। आप पहले दो भाई हैं लेकिन आपकी बुद्धि अजीब है। ” उमिया ने कहा, “जिन माता-पिता को तीर्थयात्री माना जाता है, उनकी पूजा पहली है!” गणेशजी अपने माता-पिता के वचनों को सुनकर खुश हुए.

फिर कई दिन बाद कार्तिकेय ने सारी दुनिया के ६८ तीर्थ की यात्रा की और घर आकर अपने माता-पिता को कहा, वे लंबी यात्रा से थक गए थे। उसने देखा कि गणेश खुशी के साथ मन खोले बैठे थे.

“गणेश, तुम जल्दी आ गए ?” उसने गणेश से पूछा, गणेश कहते हैं, “एक जीवित तीर्थ एक माता-पिता है।” मैंने उनकी पूजा की तो मेरे लिए अड़सठ तीर्थ की यात्रा पूरी हुई ,मेरी तीर्थयात्रा पहले ही पूरी हो चुकी है.

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Short Hindi Moral Stories- 3 चींटी और कबूतर

Short Hindi Moral Stories 3
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बारिश का मौसम था और बारिश भी चालू हो गयी थी. सभी पेड़ पौधे फिर से हरे हो गए और सभी पक्षी और प्राणी बहोत ही खुश थे. बारिश की वजह से नदीया बहने लगी। एक कबूतर पेड़ पर बैठा था. और सभी और देख रहा था उसकी नजर निचे नदी की और पड़ी.

उसने देखा तो एक चिति पानी में बाह रही थी और उसको ऐसा लगा की थोड़ी ही देर में वह शयद पानी के कारन मर भी जाये कबूतर को लगा की उसको भी चींटी की मदत करनी चाहिए। पर कैसे ?

वह तो पेड़ पर था और नदी में वह जा नहीं सकता था, फिर उसको एक सही विचार आया. उसने पेड़ पर से एक पता तोडा और निचे नदी के पानी में गिराया। चींटी उसके ऊपर चढ़ गयी और किनारे तक आ गयी. उसने कबूतर का बहोत ही दिल से धन्यवाद माना। कबूतरने कहा एक दूसरे की मदत करना हर एक जीवित प्राणी का कर्त्तव्य है.

कबूतर का घोसला वही पेड़ पर था. और चींटी वही निचे दर बना कर रहने लगी. अब थोड़े दिन बाद शिकारी शिकार करने के लिए जंगल में आये, उसने पेड़ पर बैठे कबूतर को देखा और चुपके उसके निशाना लगाया। निचे चिति यह सब देख रही थी और कबूतर को वह पता नहीं था.

चींटी को लगा मुझे भी कुछ करना चाहिए वरना वह शिकारी कबूतर को मर देगा। शिकारी सही निशाना लगाके के कबूतर के ऊपर बाण चलने ही वाला था की चींटी ने उसके पैर पर काट लिया और शिकारी निशाना चूक गया और तीर कबूतरके बाजुमें जेक लगा कबूतर तुरंत ही उड़ गया और उसकी जान बच गयी. यह Short Hindi Moral Stories तो अपने बचपन में जरूर सुनी होगी।

तात्पर्य – एक दूसरे की मदत करना हमारा कर्त्तव्य है.

Short Hindi Moral Stories- 4 मेहनत का फल

Short Hindi Moral Stories 4
Short Hindi Moral Stories

जंगल में एक जगह मुर्गी अपना बसेरा बनाकर रह रही थी. उसके आसपास कुत्ता और भालू भी रह रहे थे उन सब में बहोत ही अच्छी दोस्ती थी. और वहसब एक साथ जिंदगी बिता रहे थे. लेकिन वह पर खाना ढूंढने की बहोत ही दिक्कतों रही थी. कभी उन सबको खाना मिल रहा था और कभी नहीं।

मुर्गी को एक आईडिया आया हर राज नयी नयी जगह खाना ढूंढने से अच्छा है खुदकी ही खेती क्यों न किए जाये। उसके पास बहोत ही अच्छा आईडिया था. उसने सोचा की मक्के की खेती करते है. पर उसने सोचा सब साथ मिलकर करते है तो सबको खाना ढूंढने की दिक्कत नहीं होगी।

मुर्गी कुत्ते भाई के पास गयी वह उनका पूरा परिवार आराम कर रहा था. उसने अपना यह खेती का विचार उनके पास रख लेकिन कुत्ते ने कहा यह सब कौन करेगा इनसबके लिए बहोत म्हणत लगती है और यह सैम हमसे नहीं हो पायेगा और मुर्गी को कहा तुम भी यह ख्याल छोड़ दो साडी मेहनत पानी में जाएगी और बाद में कुछ नहीं मिलेगा, मुर्गी वह से चली गयी.

लेकिन उसको अपने परिवार की चिंता थी तो उसने सोचा क्यों ना भालू से मिला जाये और उसको इस योजना के बारेमे बताया जाये। वह भालू के पास गयी और उसको पूरी योजना बताई। पर भालू तो बहोत ही अलसी था उसने कहा यह तो हमसे न हो पायेगा और उसने इंकार कर दिया।

लेकिन मुर्गी बहोत ही मेहनतु थी उसने अकेले ही खेती चालू कर दियी उसने बीज धुंध कर उसको जमीं में बोया। थोड़े दिन बाद बारिश हुई और बीज में से पौधे बहार आ गए. थोड़े दिन बाद मायके का पाक पूरी तरह से तैयार हो गे. कुत्ते और भालू ने यह देखा और वह भी बहोत खुश हुए.

मुर्गी ने थोड़ा थोड़ा खाना सबको दिया और बाकि बचा मक्का होने घर में सुरखित रख दिया। अब उनको पुरे वर्ष कही खाना ढूंढने की जरुरत नहीं पड़ेगी। यह देख कर कुत्ते और भालू ने सोचा अगर हमने भी मेहनत कियी होती तो आज हम भी पूरा वर्ष शांति से जी सकते थे. फिर तीनो ने मिलकर वादा किया अगले साल साथ मिलकर महेनत करेंगे

तात्पर्य- महेनत से कभी भागना नहीं चाहिए अगर आपको जीवन शांति से बिताना है तो मेहनत करनी ही पड़ेगी।

Short Hindi Moral Stories- 5 बत्तख और उसका बच्चा

Short Hindi Moral Stories 5

बतख और उसका परिवार एक नदीके किनारे रह रहे थे. उनके घर के सामने ही एक बहोत ही बड़ी नदी थी। थोड़े दिनों बाद बतख का बच्चा बड़ा हो गया. तो माँ ने सोचा चलो बचे को तैरना सिखाते है लेकिन बच्चा बहोत ही डरपोक।

माँ और बच्चा नदी के नजदीक गए और माँ ने कहा चलो नदी में तैरने चले है बच्चे ने कहा ना नदी तो बहोत ही बड़ी है उसमे कोण तैरेगा।

फिर माँ उसके बचे को तालाब में ले गई और कहा चलो तालाब में तैरने चलते है. बचे ने कहा नहीं यह तो बहोत ही गहरा है इसमें तो में दुब जाऊंगा। बाकि तालाब में रहने वाले पक्षी और प्राणी यह सुनकर हसने लगे.

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(यह Short Hindi Moral Stories तो आपने अपनी किताबो में जरूर पढ़ी होगी )

माको यह सब देख कर देखके बहोत ही चिंता होने लगी उसको पता था अगर कोई कभी हमारा शिकार करने आया और हमें तैरना ही नहीं आता तो हम बच नहीं सकते, माको बहोत ही चिंता थी. उसको लगा की कोई भी तरकीब लगा कर मुझे इसको तैरना तो सीखना ही होगा क्यों की मुर्गी के बचे चलते भले, चिड़िया के बच्चे उड़ते भले और बातक के बच्चे तैरते भले. तो मेरे बचे को तैरना तो आना ही चाहिए।

उसने एक तरकीब लगायी और दोनों नदी के किनारे घूम रहे थे और नदी को देख रहे थे तभी माने जोर से चिलाके बोला पीछे लम्बड़ी भोगो और दोनों नदी में कूद गए और बच्चा थोड़े दुपकीया लगाके तैरना सिख गया. और फिर उसने पीछे देखा तो वह कोई नहीं था. और दोनों खुश होक नदी में से बहार आये और बच्चे को तैरने का दर भी चला गया. अब दोनों हर राज नदी में तैर कर शांति से जीवन बिताने लगे.

Short Hindi Moral Stories- 6 लोमड़ी का झुंड और शेर

Short Hindi Moral Stories 6

एक जंगल था वहां बहुत सी लोमड़ी और शेर रहता था, गए एक साथ ही रहती थी और वह हर रोज खाना ढूंढ ने के लिए एक साथ ही घर के बहार निकलती थी. शेर उनको हर रोज देखता था पर वह झुंड में होने के कारन उन्हें खा नहीं पाता था. यह सिलसिला बहोत रोज से चल रहा था. शेर उन्हें देखता और चला जाता, लेकिन वह सीकर नहीं कर पाता था.

एक बार लोमड़ी के झुंड में खाने को चलते जगदा हो गया उसके सरदार ने समजने की कोशिश कियी पर कोई नहीं माना, उसका सरदार झुंड में सबसे बड़ा और समझदार था, लेकिन उसकी बात किसीने नहीं सुनी और सब लोमड़ी लड़ जगद कर अलग अलग हो गयी.

अब अगली सुबह सब लोमड़ी अलग अलग खाना ढूंढने के लिए जाने लगी और खुद ही खाना खाने लगी. अब शेर को पता चला वह अकेली लोमड़ीka शिकार आराम से करने लगा थोड़े दिन बाद शेर ने सभी लोमड़ी का शिकार कर लिया और उनका पूरा झुंड समाप्त हो गया.

तात्पर्य- जब हम अपने समूह के साथ होते है तो हम कही मुस्किलो से बच सकते है. अकेले रह कर हम उसका सामना नहीं कर सकते

Short Hindi Moral Stories- 7 शेर और चूहा 2

Short Hindi Moral Stories 7
Short Hindi Moral Stories

शेर जंगल में टहल रहा था उसने सुना की कुछ आवाज आ रही है, उसने उस ओर देखा तो एक चूहा पेड़ की दो डाली के बिच में फसा हुआ था और मदत की पुकार लगा रहा था. शेर उसके पास गया, चूहे ने उसे मुक्त करने के लिए शेर से सख्त अनुरोध किया और कहा मैं तुमसे वादा करता हूँ, अगर तुम मुझे बचाओगे तो मैं किसी दिन तुम्हारी बहुत मदद करूँगा, उसको दया आ गयी. शेर ने उसको निकला बहार। शेर चूहे के आत्मविश्वास पर हंस पड़ा और उसे जाने दिया और बोलो तुम छोटे चूहे मेरी क्या मदत करोगे में जंगल का राज हु. मुझे किसी की जरुरत नहीं।

एक दिन, कुछ शिकारी जंगल में आए और शेर को अपने साथ ले गए। उन्होंने उसे एक पेड़ से बांध दिया और दूसरा शिकार ढूंढने के लिए चले गए। शेर बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था और फुसफुसाहट करने लगा। चूहे ने वह देखा और वह उसके पास चला गया और शेर को परेशानी में देखा। जल्दी से, वह भागा और शेर को मुक्त करने के लिए रस्सियों को काट दिया और दोनों जंगल में भाग गए.

Short Hindi Moral Stories- 8 अकबर बीरबल चतुराई

Short Hindi Moral Stories 8

एक दिन, राजा अकबर ने अपने दरबार में एक प्रश्न पूछा, जिसने सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया। जैसा कि वे सभी ने जवाब जानने की कोशिश की लेकिन किसी को सही जवाब पता नहीं मिला, बीरबल ने अंदर जाकर पूछा कि मामला क्या है। उन्होंने उनसे सवाल दोहराया। सवाल था की अभी सहर में कितने लोग है.

बीरबल तुरंत मुस्कुराए और अकबर के पास गए. उसने उत्तर की घोषणा की, उन्होंने कहा कि शहर में इक्कीस हजार, पांच सौ और तेईस लोग है । जब उनसे पूछा गया कि उन्हें जवाब कैसे पता है, तो बीरबल ने जवाब दिया, “अपने लोगों से लोगो की संख्या गिनने के लिए कहें। यदि वहाँ अधिक हैं, तो कई रिश्तेदार दूसरे सहर से यहाँ ए होंगे। यदि कम हैं, तो हमारे शहर के लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने जरूर दूसरे शहर गए होंगे। ” जवाब से प्रसन्न होकर अकबर ने बीरबल को माणिक और मोती की चेन भेंट की.

Short Hindi Moral Stories- 9 मुर्ख बच्चा

Short Hindi Moral Stories 9

एक गाँव में, अपने पिता के साथ एक लापरवाह लड़का रहता था। लड़के के पिता ने उसे बताया कि वह खेतों में चरने के दौरान भेड़ों की निगरानी के लिए काफी बूढ़ा हो गया था। हर दिन, उसे भेड़ों को घास वाले खेतों में ले जाना और उन्हें चरते हुए उनकी निगरानी करना उनका काम था. हालाँकि, लड़का नाखुश था और भेड़ को खेतों में नहीं ले जाना चाहता था। वह दौड़ना और खेलना चाहता था. लेकिन उसके पिता ने जबरदस्ती उसे इस काम पे लगा दिया।

उसको लगा की चलो इसी काम में कुछ मजा लेते है, इसलिए, उन्होंने कुछ मजेदार करने का फैसला किया। दूसरे दिन वह भेद चराने के लिए गया और जोर से चिल्लाया “भेड़िया भेड़िया ” भेड़ों को खाने से पहले परोसे बचने के लिए पूरा गांव पत्थरों लेके दौड़ता हुआ आया. जब ग्रामीणों ने देखा कि कोई भेड़िया नहीं है, तो उन्होंने शांति का आभास किया और सबको लगा इस लड़के ने हमारा समय बर्बाद किया। एक बार यही हुआ लेकिन इस बार भी कोई भेड़िया नहीं था. तब लोगो ने उसपर विश्वाश करना छोड़ दिया।

एक दिन जब वह लड़का पहाड़ी पर गया तो उसने अचानक एक भेड़िये को अपनी भेड़ों पर हमला करते देखा और जोर से चिलाय “भेड़िया भेड़िया ” लेकिन एक भी गाववाला उसकी मदद के लिए नहीं आया। गाववालो ने सोचा कि वह उन्हें फिर से बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा है और उसे या उसकी भेड़ों को बचाने नहीं आये उस लड़के ने उस दिन में उसकी मूर्खता के कारण कई भेड़ों को खो दिया।

Short Hindi Moral Stories- 10 स्वार्थी लोमड़ी

Short Hindi Moral Stories 10

एक दिन, एक स्वार्थी लोमड़ी ने रात के खाने के लिए एक सारस को आमंत्रित किया। सारस उस खाने के निमंत्रण से बहुत खुश था, वह समय पर लोमड़ी के घर पहुंचा और अपनी लंबी चोंच के साथ दरवाजे खत खतया। लोमड़ी उसे खाने की टेबल पर ले गई और उन दोनों के लिए छिछले कटोरे में कुछ सूप परोसा। चीचली कटोरी सारस के लिए बहुत छोटी थी, इसलिए वह सूप नहीं पि पाया था। लेकिन, लोमड़ी ने उसका सूप जल्दी से चाट लिया.

सारस नाराज़ और परेशान था, लेकिन उसने अपना गुस्सा नहीं दिखाया और विनम्रता से व्यवहार किया। लोमड़ी को सबक सिखाने के लिए उसने फिर उसे अगले दिन रात के खाने के लिए लोमड़ी को अपने घर आमंत्रित किया. उसने सूप भी परोसा, लेकिन इस बार सूप को दो लम्बे गिलास में परोसा गया। सारस ने उसके फूलदान में से सूप निकाला, लेकिन उसकी गर्दन के कारण लोमड़ी उसमें से कुछ भी नहीं पी सकती थी. लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह काफी शर्मिंदा हो गई.

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