Free Latest Hindi Poems For Kids Part-1

आपका हमारी वेबसाइट Hindi Eng में स्वागत है. आज हम बच्चो के लिए कुछ छोटी सी कविताये लेके आये है जिस आर्टिकल का नाम Hindi Poems For Kids है. मुझे आशा है की यह हिंदी कविताये बच्चो को बहोत ही पसंद आने वाली है. आपको पता ही है की आज तो बच्चो के जीवन में किताबो का महत्व बहोत ही कम हो गया है और छोटे बच्चे भी मोबाइल में खेलते है या उसको अपना एंटरटेनमेंट का साधन समझते है.

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यह सही हो रहा है या गलत वह तो मुझे पता नहीं पता लेकिन हमने भी यहाँ कोशिश किए है की बच्चो की मनपसंद चीजे यहाँ हम digital माध्यम से आप तक पहुचाये जाये। यदि आपको यह आर्टिकल पसंद आता है तो हमें कमेंट करके जरूर बताये। और अगर आपके पास भी खुद लिखी हुई कोई कविताये या कहानिया है तो आप हमें भेज सकते है, हम उसको आपके नाम के साथ हमरी Website में प्रकाशित करेंगे.

Hindi Poems For Kids Part-1 1

“परिचय” हिंदी कविता (“Parichay” Famous Hindi Poems For Kids)

उपा का प्राची में आभास
सरोरुह का, सर बीच विकाश ।।
कौन परिचय था ? क्या सम्बन्ध ?
“गगन मण्डल में अरुण विलास”

रहे रजनी में कहाँ मलिन्द ?
सरोवर बीच खिला अरविन्द ।
कौन परिचय था? क्या सम्बन्ध ?
“मधुर मधुमय मोहन मकरन्द ।”

प्रफुल्लित मानस चीच सरोज।
मलय से अनिल चला कर खोज ॥
कौन परिचय था ? क्या सम्बन्ध ?
“वही परिमल जो मिलता रोज”

राग से अरुण, घुला मकरन्द।
मिला परिमल से जो सानन्द ।।
चही परिचय था, वह सम्बन्ध।
“प्रेम का, मेरा तेरा छन्द ॥”

यह हिंदी कविता में कवी ने परिचय की बात किए है जिसमे आप ऊपर देख सकते है की कैसे कवी ने आपने मन की बात आपको बताई है और शयद आप भी ऐसे ही अपने मन की बात को सुनहरे अक्षरों में किसी और को व्यक्त कर सकते है. इसमें परिचय की बात व्यक्त होने के कारण इसे हमने प्रथम स्थान दिया है और अगर आपको इससे जुड़ा कोई प्रश्न मन में है तो आप निचे कमेंट कर सकते है.

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“मधुर” हिंदी कविता (“Madhur” Hindi Rhymes For Kids)

मधुर है स्रोत मधुर है लहरी ।
न है उत्पात, छटा है छहरी ॥
मनोहर झरना,
कठिन गिरि कहाँ विदारित करना ।
बात कुछ छिपी हुई है गहरी।
मधुर है स्रोत मधुर है लहरो ।
कल्पनातीत काल की घटना।
हृदय को लगी अचानक रटना ॥
देखकर झरना,
प्रथम वर्षा से इसका भरना ।
स्मरण हो रहा शैल का कटना।
कल्पनातीत काल की घटना ॥

कर गई प्लावित तन मन सारा ।
एक दिन तव अपाङ्ग की धारा ।।
हृदय से मरना-
यह चला, जैसे गजल ढरना।
प्रणय वन्या ने किया पसारा।
कर गई प्लावित तन मन सारा ।।
प्रेम की पवित्र परछाई में ।
लालसा हरित विटपि माँई में ।
वह चला करना,
तापमय जीवन शीतल
करना।
सत्य यह तेरो मुघराई में।
प्रेम की पवित्र परछाई में ।।

आप इसमें कवी द्वारा दर्शायी सभी चीजों की मधुरता को देख सकते है. इसमें शब्दों का ऐसा मेल है जो शायद आपको सभी जगह देखने को नहीं मिलता। आपको पता ही होगा की इसके जैसी कोई भी रचना में शब्दों का सही से मिलन बहोत ही जरुरी है वरना कोई रास नहीं बैठता और पढ़ने वाले सभी लोगो को शायद मजा नहीं आता.

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“फानन” हिंदी कविता (“Fanan” Nursery Poem in Hindi)

Hindi Poems For Kids Part-1 2

विश्व के गौरव विजेग में।
जब करता येत, रचते,
मानस को कुछ शान्त,
होगी कुछ ऐसी हलचन,
भरहता है श्रम के बन में,
विश्व के कुसुमिरा फानन में।
जय खता हूँ अभारी हो,
पल्लरियों से दान,
कलियों की माला बन जाती,
पनियों गाना विकलता बढ़ती हिमान में,
विश्वपति, मेरे प्रांगण में।
जब करता हूँ कभी प्रार्थना,
कर संकलिन विचार,
नभी समना के नपुर की,
गी मनकार नमस्ता है. मन में,
विश्व के नीरव निसन में।

“प्रथम प्रभात” हिंदी कविता (“Prabhat” New Hindi Poems For Kids)

मनोचियाँ सग कुज-सी थीं सो रही
अन्त:करण नबौन मनोहर नीद में ।
‘नोल-गगन सा शान्त हृदय या हो रहा
याहा आन्तरिक प्रकृति सभी सोती रहीं।
स्पन्दन-हीन नवीन मुकुल मन तुष्ट धा,
अपने ही प्रश्छन्न जिमल मकरन्द से।
पटा, अचानक विस मलयानिल ने तभी,
फूलों के मौरभ से पूरा लड़ा हुआ।

आने ही कर स्पर्श गुदगुदाया मुझे,
बुलो आँध आनन्ददृश्य दिसला दिया।
मनोयेग मधुकर-सा फिर तो के,
मधुर-मधुर स्वर्गीय गान गाने लगा।
यी होने लगी मुम मकरन्द को।
प्रान पीहा पाल उठा प्रानन्द में।
मीदव ने पाल-चम-सी प्रकट हो,
शुन्यदय को नवल राग गित किया।
मदाः मानहुषा में प्रम सुतीर्थ में-
मन पवित्र उत्साह पूर्ण मा हो गया,
विश्व, विमल पानन्द-भवन-सा हो गया,
मेरे नावन या या प्रथम प्रभात धा ।।

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प्रथम प्रभात यानि दिन का सवेरा। आप इस कविता में देख सकते है की कवी ने प्रभात यानि दिन के सवेरे को कैसे सुनहरे अक्षरों में चाँद के साथ आपको व्यक्त किया है जिससे की सभी शब्दों का वजन और भी बढ़जाता है और आपको पढ़ने में मजा भी आता है. अगर आप माता पिता है तो आपको एक ध्यान देना है की बच्चो को सिर्फ आपको यह पढ़कर नहीं सुनाना है. उनको इसका मतलब नहीं पता होगा तो आपको बच्चो को अंत में इसका मतलब भी समजाना है जिससे उनको समाज आये.

“खोलो द्वार” हिंदी कविता (“Kholo Dwar” Hindi Poems Lyrics)

शिशिर कामों से लदो हुई, मक्षो के भीगे हैं सब तार।
चलता है पश्चिम का मारुन, कर शीतलता का भार ।
भीग रहा है रजनी का बहा मुन्दर कोमल कयरी-भार ।
वरुण किया सम कर सेहलो, सोला प्रियतमा खोलो हार ॥
धूल लगी है, पद काही से विधा हुआ, है दुःख अपार ।
किसी खरह से भूखा-भटका था पहुँचा तेरे द्वार ।

रो न इसना, धूलिधूसरित होगा नहीं तुम्हारा द्वार ।
थो डाले। इनका प्रियर, इन आँखों से आंसू द्वार ।।
मेरे धूलि लगे पैरों से, इतना करो न घृणा प्रकाश ।
मेरे ऐसे धूल कों से कप, तेरे पद को अयशश।
पैरों ही से लिपटा-लिपटा कर लूंगा निज पद निर्धार ।
अब तो बोड़ नहीं सकता है, पाझर प्राध्य तुम्हारा द्वार ।।
सुप्रभात मेरा भी होवे, इस रजनी का दुःख अपार-
मिटवावे जो तुमको दे खोलो, प्रियतम ! सोलो हार ।।

ये बदिम भ्र, युगल कुटिल कुन्तल घने,
नौल नलिन से नेत्र-चपल मद से भरे,
प्रगण राग रखित कोमल हिम खण्ड से-
मुन्दर गोल कपोल, मुडर नासा बनी।
धवन स्मिन जैम शारद घन बीच में-
(जो कि कौमुद्रो में रञ्जित है हो रहा)
चपना-मी योया हूँसी से बढ़ी।

म्प जलधि में लोल लहरियाँ उठ रहीं।
मुक्तागण हैं लिपटे कोमल कम्यु में ।
चाल चितवन चमकीली है कर रहो-
नृष्टि मात्र को, मानो पूरी स्वच्छता-
नीनांगुक बनकर लिपटी है, अग में।
‘प्रग्नमयत यह भी टकन कौन सा
प्र.न जिममें कोई दृष्टि लगे उसे।
मिने हुए ये सुमन मुभि मकरन्द मे-
गनिनियों के फरने व्यजन मे ।

“दो बुँदे” हिंदी कविता (“Do Bunde” Hindi Poems For Kids)

शरद का सुन्दर नीलाकाश,
निशा निखरी, था निमल हास।
बह रही छाया पथ में स्वच्छ
सुधा सरिता लेती उच्छ्वास ॥
पुलक कर लगी देखने धरा, ,
प्रकृति भी सको न आँखें मूद ।
सुशीतलकारी शशि आया,
सुधा की मानों वड़ो सी बूंद ॥

हरित किसलयमय कोमल वृक्ष,
झुक रहा जिसका पाक भार ।
उसी पर रे मतवाले मधुप !
बैठकर करता तू गुजार ।।
न आशा कर तू अरे! अधीर,
कुसुम रज-रस ले लूँगा गूंद ।
फूल है नन्हा-सा-नादान,
भरा मकरन्द एक ही बूंद ॥

“पावन प्रभात” हिंदी कविता (“Pavan Prabhat” Short Hindi Poems)

Hindi Poems For Kids Part-1 3

नव तमाल श्यामल नीरद माला भली
श्रावण की राका रजनी में घिर चुकी।
अब उसके कुछ बचे अंश आकाश में
भूले भटके पथिक सदृश हैं घूमते ।।

अर्ध रात्रि में खिली हुई थी मालती,
उस पर से जो बिछल पड़ा था, वह चपल-
मलयानिल भी अस्तव्यस्त है धमता
उसे स्थान ही कहीं ठहरने को नहीं।
मुक्त व्योम में उड़ते उड़ते डाल से।
कार अलस पपोहा की वह ध्वनि कभी-
निकल निकल कर भूल या कि अनजान में,
लगती है खोजने किसी को प्रेम से ।

क्लान्त तारफागण की मद्यप-मण्डली,
नेत्र निमीलन करती है फिर खोलतो।
रिक्त चपक-सा चन्द्र लुढ़क कर है गिरा,
रजनी के आपानक का अब अंत है।
रजनी के रजक उपकरण बिखर गये,
चूँघट खोल उपा ने झाँका और फिर-
अरुण अपांगों से देखा, कुछ हँस पड़ी,
लगी टहलने प्राची प्राङ्गण में तभी ।

इसमें कवी ने पवन प्रभात को अपने कुछ अक्षरों में व्यक्त किया है. बच्चो को शयद यह सभी शब्द समज नहीं आये या इसका मतलब एक बार में समज नहीं आये तो यह आपकी जिमयेदारी है की आपको बच्चो को इसका पूरा मतलब संजना है. यदि आपके मन में कोई इन सभी कविताओं के प्रति प्रश्न है तो आप निचे कमेंट करके बता सकते है.

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Hindi Poems PDF Download

अगर आपको हिंदी कविता की PDF Files Download करनी है तो आप हमें कॉन्टेक्ट कर सकते है. हमने यह सभी कविता ओं को PDF के स्वरुप में राखी हुई है. जिसको हम आपको मेल द्वारा पंहुचा सकते है. लेकिन इन सभी हिंदी कंटेंट का पूरा श्रेय इनके लेखकों को जाता है, हम यहाँ सिर्फ इनको डिजिटल मथ्यम से आप तक पहोचाने का काम करते है.

Summary

Hindi Poems For Kids Part-1 की सभी कविये आपको कैसी लगी वह आप निचे कमेंट करके बता सकते है और आशा करता हु की आपको यह सभी पसंद आयी होगी। ऐसी ही बच्चो के लिए मजेदार कविताये और कहानिया आपको यहाँ मिल जाएँगी जिसके लिए आपको Home Page पर जाना है.

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